सत्ता और राजनीती में रूचि रखने वाले बोहोत से लोग है। सोशल मीडिया ने उन्हें जो चाहे जैसी चाहे प्रतिक्रियाएं देने का अवसर प्राप्त करवाया है। तो इस स्वतंत्रता की जय हो। और सोशल मीडिया पर खुद की प्रतिक्रिया देनेके आलावा औरों के पोस्ट ( पेड मीडिया ) को आगे बढ़ने वालोकी भी जय हो। आप किसी भी मत विचार या पार्टी की सराहना करें मगर इन सब में जिन लोगोंने देश के लिए जान दी क्या ऐसे लोगों के तस्वीरों और विचारोंको तोड़ मरोड़कर अपनी बात को रखना आप को उचित लगता है? कुछ लोगोंको हर चीज धर्म और राजनीतीसे जोड़नेमें बोहोत मजा आता है। मगर क्या आपके जीवन में और बेहतर और कोई विचार नहीं। लोग सोशल मीडिया पर ही आपने विचारों को रखतें है फिर और लोग उसपर कमैंट्स करतें है, लोग इन बातों से एक दूसरों को नाराज करतें है आखिर क्या पातें है ? जो सच आपको बताया जा रहा है आप कैसे तय करतें है की वही सच है। आपके प्रोफइल को कोई देख रहा है, कोई आप के साधारण जीवन के साधारण बताओं का फायदा उठाया जारहा है, आप पर कई चीजे थोपी जा रही है और आपके विचार भी बदले जा रहें है। ये सोशल मीडिया का सच...