उस स्क्रीन पर काले काले
हिलते धब्बे तुम हो! ये आश्चर्य है|
ये निश्चित ही हमारा सृजन काल है|
डॉक्टर के दरवाजे पर लिखा है
यहां लिंग जाँच मना है।
उन्होंने बताया है ये सातवा महीना है
मुझे कृष्ण के आठवे होने की याद आती है।
अब बेबी साफ सुन सकता है और आँखे खुली बंद कर सकता है
आप आपने बेबी से खूप बाते करो,
फिरसे कृष्ण और अभिमन्यु झलकते है।
आधा अंधेरा है, आधा उजाला है
इस प्रसन्न बेला में
रह-रहकर उठती है
एक हरी मितली-सी,
रक्त के समंदर से लाना है अमृतकलश!
तुम्हारे इन सांसों से
कांप-कांप उठते हैं जंगल,
दो-दो दिल धड़क रहे हैं तुममे
चार-चार होंठों से पी रही हो समंदर!
चार-चार आंखों से कर रही हो आंखें चार
महाकाल से!
क्या कहु अभी जो जन्मा ही नहीं है उससे
कहु जीवन सुन्दर है या निर्दय कठोर
सब काला दिखाई देता है
ये आँखों का दोष नहीं शहर ढका है काले धुवेसे।
ये कहु की आने वाले नस्ल के लिए हमने कुछ नहीं रख्खा साफ़
या ये कहु जीवन परीक्षा लेगा हर क्षण चाहे लेनी हो एक सांस
मैंने पेशी के गुणाकार को दिया न्याय
या श्रृंगार मेरा सम्भोग सा हो गया दूषित
मैंने सुंदर सपना देखा फिर से खुद को पाने का
क्या तुम्हे जन्म देने की नासमझी की है?
तुम हो माँ के गर्भ में सुरक्षित पर बाहर रथचक्र घसीटा जा रहा है
यहां वहां नरभक्षी है नरभोगीभी धरतीसे मनुष्य मिटता जा रहा है।
और शुरू हुआ द्वंद्व क्या लड़की होगी तो चुनोतिया होगी एकदम अलग
ये तो केवल डर है, ये अख़बारोंकी भेट है, तथ्य और सत्य हम बदल लेते है
मैंने नाबालिक लड़कियों के शोषणके बारे में पढ़ा है
और पॉर्न में पैसा कमाने वाली लड़कियों के बारे में भी
मैंने लड़कों के अगवा होनेकी खबरे पढ़ी है
और जिगोलो के बढ़ते व्यवसाय की.
मैंने इंसानो को अपनी तरह से बांटा है
एक वो जिसे संतोष का पता है
और दूसरे जिनकी पाते रहने की भूक खत्म नहीं होती।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की तुम कोण हो लड़का या लड़की ?
अन्याय से लड़ने की बस तुममे ताकत हो
इन सब से ज्यादा याद रखना क्या है आस्तित्व
खोज लेना जीवन का उद्देश्य, अपने तत्व
डराना नहीं चाहता मै
बस याद रखना ये जीवनभर
अपने माँ का स्तनपान करो और सुनो धड़कन उसकी
सर पर उसके सांसो की आहट समझो दर्द की सिसकी
और ये खत लिखने वाला बाप है तेरा
तू मेरे आखोंका आकाश है , तू ख्वाब है मेरा।
हिलते धब्बे तुम हो! ये आश्चर्य है|
ये निश्चित ही हमारा सृजन काल है|
डॉक्टर के दरवाजे पर लिखा है
यहां लिंग जाँच मना है।
उन्होंने बताया है ये सातवा महीना है
मुझे कृष्ण के आठवे होने की याद आती है।
अब बेबी साफ सुन सकता है और आँखे खुली बंद कर सकता है
आप आपने बेबी से खूप बाते करो,
फिरसे कृष्ण और अभिमन्यु झलकते है।
आधा अंधेरा है, आधा उजाला है
इस प्रसन्न बेला में
रह-रहकर उठती है
एक हरी मितली-सी,
रक्त के समंदर से लाना है अमृतकलश!
तुम्हारे इन सांसों से
कांप-कांप उठते हैं जंगल,
दो-दो दिल धड़क रहे हैं तुममे
चार-चार होंठों से पी रही हो समंदर!
चार-चार आंखों से कर रही हो आंखें चार
महाकाल से!
क्या कहु अभी जो जन्मा ही नहीं है उससे
कहु जीवन सुन्दर है या निर्दय कठोर
सब काला दिखाई देता है
ये आँखों का दोष नहीं शहर ढका है काले धुवेसे।
ये कहु की आने वाले नस्ल के लिए हमने कुछ नहीं रख्खा साफ़
या ये कहु जीवन परीक्षा लेगा हर क्षण चाहे लेनी हो एक सांस
मैंने पेशी के गुणाकार को दिया न्याय
या श्रृंगार मेरा सम्भोग सा हो गया दूषित
मैंने सुंदर सपना देखा फिर से खुद को पाने का
क्या तुम्हे जन्म देने की नासमझी की है?
तुम हो माँ के गर्भ में सुरक्षित पर बाहर रथचक्र घसीटा जा रहा है
यहां वहां नरभक्षी है नरभोगीभी धरतीसे मनुष्य मिटता जा रहा है।
और शुरू हुआ द्वंद्व क्या लड़की होगी तो चुनोतिया होगी एकदम अलग
ये तो केवल डर है, ये अख़बारोंकी भेट है, तथ्य और सत्य हम बदल लेते है
मैंने नाबालिक लड़कियों के शोषणके बारे में पढ़ा है
और पॉर्न में पैसा कमाने वाली लड़कियों के बारे में भी
मैंने लड़कों के अगवा होनेकी खबरे पढ़ी है
और जिगोलो के बढ़ते व्यवसाय की.
मैंने इंसानो को अपनी तरह से बांटा है
एक वो जिसे संतोष का पता है
और दूसरे जिनकी पाते रहने की भूक खत्म नहीं होती।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की तुम कोण हो लड़का या लड़की ?
अन्याय से लड़ने की बस तुममे ताकत हो
इन सब से ज्यादा याद रखना क्या है आस्तित्व
खोज लेना जीवन का उद्देश्य, अपने तत्व
डराना नहीं चाहता मै
बस याद रखना ये जीवनभर
अपने माँ का स्तनपान करो और सुनो धड़कन उसकी
सर पर उसके सांसो की आहट समझो दर्द की सिसकी
और ये खत लिखने वाला बाप है तेरा
तू मेरे आखोंका आकाश है , तू ख्वाब है मेरा।
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