कोसने हसने
हसने कोसने के
अजीब सिलसिलेके दर्मियां
तुमने मेरे क़त्ल का मज़ाक उड़ाते हुए
कहा था “ भाउक मत बनो”
दरसल तब मेरा कान तुम्हारी छातीपर था।
उन दिनों मैंने भी खास शौक पाल रख्खा था
जेबमें हमेशा एक चाकू रहता और वक्त मिलतेही
अपने नाख़ून काट लेता था।
मेरी बदलती आँखे
बढ़ते नाख़ूनेसे पता चल चूका था।
चुभता तो मैभी था।
मेरे पास थे शब्द
और तुम्हारे पास थी आँखे
आवाज के किसी बाज को तुमने कभी जिन्दा नहीं छोड़ा था।
युही अनायास अचानकसे
कोसते मजाक करते
मजाक करते कोसते
मैंने जाना था तुमभी हमेशा अपने पास हथियार रखती हो
मै कहता हूँ “संभलकर“
तब मेरी पीठपर चलते चलते अंगूठेसे मेरी गर्दन के बिच की नसोंको दबा देती हो।
काटना ही है एक दूसरे को तो हथियार बदली करलो!
तुम मेरा गला काटना
मै तुम्हारे सिनपे वार करूँगा
और मर ना सकें दोनों तो बता देता हूँ
हाथ पकड़कर एकदुसरें का
कूद जायेंगे
और चिल्लाते हुए कहेंगे
ये प्यार ही है जो हम करतें है
वो बादलही था जो हमें बोया था
वो चाँद ही था जो मौतसे पहले हमने पिया था।
इतनी लम्बी लड़ाई के बाद फिर वही
मैं कॉफ़ी मांगूंगा और तुम शक्कर पूछोगी।
तुम सोने चली जाओगी मैं तकिया छुपाकर बैठूंगा।
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